सोमवार, 10 अक्टूबर 2016

दुश्मन

दुश्मन छिप-छिपकर ,
करते हैं ।
भारत के दिलों पर प्रहार।
 फेकते हैं जुल्म का गोला ,
मानवता पर करते प्रहार।
 मासूम निर्दोषों को
 बनाते हैं शिकार ।
ये गीदड़ नोच रहे हैं
 मानवता का मांस
देख रहे हैं सब
 देख रहा पूरा संसार
चुप हैं ऐसे जैसे
सब हो अंधापन के शिकार।
 क्या विश्व में ?
मानवता को बचाने की
 इच्छा  विनष्ट हो गई है आज।
 ऐसा नहीं कि
 भारत दुष्टों से डरा हुआ है।
 ऐसा नहीं कि
 भारत उन सबों से नहीं लड़ा हुआ है।
 भारतीयों के पराक्रम को
 देख चुका है संसार।
 शांति का गीत  गाकर
भेजते आतंकियों का उपहार।