सोमवार, 10 अक्टूबर 2016

रोको मत!

तोपों को गरजने दो
फड़कती बाँहों को
भारत का नया भूगोल गढ़ने दो
नहीं परवाह परमाणु ज्वाला का
एक बार इसे धधकने दो
शांति का पुकार कर
असंख्य कुर्बानियाँ
हम देते आए
मानवता की रक्षार्थ
संधियों पर हम बढ़ते आए
मानवता भी लज्जित होता
शहीद हेमराज के
शीश काटे जाने से
क्या मिला ?
शांति ध्वज फहराने से
अब भारतीय सेना को
रण शौर्य दिखाने दो
अब वक्त कह रहा
चिग्घाड कर लाहौर पर
बम बरसाने दो
बहुत हुआ मौन
अब शौर्य दिखाने दो
छद्म युद्ध झेल रही सेना को
खुले रणक्षेत्र में जाने दो
आतंक की काली काया में
अब आग लगाने दो
रोको मत
फौलादी बाँहों को
राष्ट्र को एक अवसर हैं
खूनी कलंक मिटाने दो
रोको मत!