अठखेलियाँ
विश्व भूख भय और युद्ध से मुक्त हो ,
जीवन की राहों से शोक लुप्त हो ।
मानव करे खुशी से अठखेलियाँ ,
विश्व में न मनाई जाए खूनी होलियाँ।
वह विकास नहीं जो प्रहारक हो ,
हो वही जो शोक निवारक हो।
शासक वही हो ,जो त्यागी हो ,
जन-जन के सुख का अभिलाषी हो।
नृप नृघ्न , मानवता त्यागी ,
क्या होगा वह सत्य का भागी ?
मतों से न विश्व बँटे ,
भाई भाई नफरत की लकीर खींच न हटे।
हर जीव के बीच प्यार का अटूट बंधन हो ,
विश्वास का इतना मजबूत पकड़ हो ।
तब क्या प्रहारक अस्त्र-शस्त्र होंगे ,
न उद्विग्न राष्ट्राध्यक्ष होंगे।
तब शोध से परोपकार का बोध होगा ,
मानवता की राह में, न अवरोध होगा ।
अर्थोंपार्जन जीवन में नूतन बदलाव
क्या लाएगा?
आनंद का चरम सुख ,
शांति को मानव क्या पायेगा?
धनाथॆ, स्वार्थ प्रलय होगा,
वसुधा विध्वंसित होगी ।
रोक न सकेगी कोई शक्ति भी उस दिन ,
शक्तियां कलंकित होगी।
धनसंचय धनस्पृहा त्याग नर आगे आओ ।
ओ धनवालों प्रलय हुंकार रहा सावधान हो जाओ।
खुशहाली का गान
हाथों को जब न काम मिलेगा ।
किये काम का जब,
न दाम मिलेगा।
खाली जेब बाजारवाद के मेले में,
क्या महत्त्व अपमान के जहरीले
सागर के बीच,
जीवन को खेने में ।
निकम्मे हाथ कब तक खाली रहेंगे ?
विवश हो बंदूक उठाएँगे ।
तब चोर नहीं न्याय के सिपाही होंगे ।
अन्यायी कहे जाने वाले ही न्यायी होंगे ।
व्यक्ति व्यक्ति अवैध कारोबारी होंगे ,
जब सत्ताधारी ही भष्ट्रता के व्यापारियों होगे ।
औरतें कमाएंगी बदन दिखा कर ,
नंगी होंगी अपने बच्चों की आँख बचाकर ।
पुरुष शराब बनाएंगे ,
नौजवान शराब के नशे में ,
लुटेरों की तिजोरियां तोड़ने
आगे बढ़ जाएंगे ।
किसान खेतों में गांजा और कोका उपजाएगे,
रोटी के जगह डबल रोटी खाएंगे ।
स्कूलों में पढ़ाया जाएगा ,
आग लगाना
बुद्धिजीवियों के मन का लाश जलाना।
तब भगवान भाग खड़े होंगे,
इंटरनेट से उनके चरणों पर पुष्प चढ़े होंगे ।
मच्छर विलुप्त होगे भ्रष्टाचार के प्रदूषण से ,
मानव बलवान होगा, दुराचार के पोषण से ।
आह ! तब कैसा दृश्य होगा ।
इसका अलग से ना कोई फी होगा।
न हिंदुस्तान होगा,
न होगी हिंदी।
राष्ट्र में होगी हिंदीभाषियों की बंदी ।
इंडिया का क्या सचमुच रंग होगा।
इंग्लिश का आया वसंत होगा।
राजनीतिज्ञ गाएंगे खुशहाली का गान ।
फूलों की वर्षा बरसाएंगे ,
स्वर्गवासी नेता महान ।